[लघु सिंचाई विभाग] उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजना |ऑनलाइन आवेदन |एप्लीकेशन फॉर्म|

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यूपी लघु सिंचाई स्कीम के बारे में आपको बताएंगे आप सभी जानना चाहते हैं लघु सिंचाई योजना क्या है और हम इसका लाभ किस प्रकार से ले सकते हैं किसानों को इससे क्या फायदा होगा आप सभी जानते हैं सभी किसान खेती करते हैं|और किसानों को जो भी उत्तर प्रदेश की लघु सिंचाई की योजनाएं चल रही हैं उनका पूरा पूरा लाभ मिलना चाहिए इसके लिए दोस्तों कृपया हमारे इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़ें हम आपको इसमें लघु सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश योजनाओं की पूरी जानकारी देंगे की कौन-कौन सी ऐसी योजनाएं हैं जिनका किसान लोग पूरा पूरा लाभ लेकर  फायदा ले सकते हैं|

सूखे की बार-बार पड़ने वाली विभीषिका से निपटने हेतु 19वी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में सिंचाई के विकास के महत्व को समझा जाने लगा था। वर्ष 1897-98 एवं 1899-1900 में पड़े भयंकर सूखों में सिंचाई के नियोजित एवं त्वरित विकास ने महती भूमिका निभायी। वर्ष 1901 में गठित प्रथम इरीगेशन कमीशन को देश में सूखे के विरूद्ध निपटने में सिंचाई के क्षेत्र में रिपोर्ट उपलब्ध कराने का कार्य सौंपा गया। कमीशन द्वारा निजी सिंचाई साधनों के विकास हेतु कतिपय सुझाव दिये गये। वर्ष 1939 में शासन द्वारा Agricultural Reorganization समिति गठित की गयी, जिसने वर्ष 1941 में अपनी रिपोर्ट दी। इसमें अन्य के अलावा जल उठाने के साधन/मशीनरी, छोटी बोरिंग, नलकूप, कूप छेदकों की ट्रेनिंग आदि के सम्बन्ध में कतिपय अनुशंसायें की गयी थी। उपरोक्त संस्तुतियों को वर्ष 1947 में मुख्य कृषि अभियन्ता के अधीन कार्यान्वित किया गया। सिंचाई का कार्य प्रदेश को तीन जोन में बांटकर कराया गया, जिसके मुख्यालय मेरठ, कानपुर तथा वाराणसी बनाये गये। इस प्रकार निजी नलकूपों हेतु बोरिंग का कार्य पहले एग्रीकल्चरल इन्जीनियरिंग विभाग के माध्यम से किया जाता था।

पहली जुलाई 1954 को इस विभाग को नियोजन विभाग से सम्बद्ध किया गया, तत्पश्चात् वर्ष 1964 में शासनादेश सं0 5819/38-8-517/1964 दिनांक 08.10.1964 द्वारा आयुक्त कृषि उत्पादन एवं ग्राम्य विकास की देख-रेख में लघु सिंचाई विभाग की स्थापना की गयी।

यूपी लघु सिंचाई योजना के उद्देश्य

  • इस विभाग का मुख्य उद्देश्य कृषि उत्पादन में वृद्धि हेतु कृषकों के निजी सिंचाई साधनों का निर्माण कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे प्रदेश के हर खेत में सुनिश्चित् सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके तथा प्रदेश के कृषक अधिकाधिक खाद्यान्न उत्पादन कर प्रदेश व देश के आर्थिक विकास में योगदान कर सकें।
  • उपरोक्त उद्देश्य की पूर्ति के क्रम में लघु सिंचाई विभाग द्वारा कृषकों को निजी लघु सिंचाई संसाधनों के विकास हेतु अनुदान इत्यादि की सुविधाऐं प्रदान की जाती है तथा तकनीकी मार्ग-निर्देशन दिया जाता है।
  • विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत् विभाग द्वारा प्रदत्त अनुदान उत्प्रेरक का कार्य करता है और लघु सिंचाई साधनों के निर्माण के लिए स्वयं का निवेश करने हेतु कृषकों को प्रेरित करता है।
  • प्रदेश में गहराते भूजल संकट के दृष्टिगत विभाग वर्षा जल संचयन,सतही जल के इष्टतम उपभोग एंव जल संरक्षण की विधाओं को प्रोत्साहित कर भूजल संर्वधन हेतु प्रयासरत है।

उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजनाएं

अब हम आपको बताएंगे कि कौन कौन सी उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजनाएं चल रही हैं जिनका आप लाभ ले सकते हैं|

  • गहरे नलकूप योजना
  • डा0 राम मनोहर लोहिया सामूहिक नलकूप योजना
  • पठारी क्षेत्रों में इनवेलरिग मशीन से बोरिंग योजना
  • सतही पम्पसेट योजना
  • वर्षा जल संचयन/उपयोग एवं भूजल रिचार्ज हेतु चेकडैम निर्माण योजना
  • ब्लास्टकूप निर्माण योजना

उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन

  • दोस्तों यदि आप लघु सिंचाई योजनाओं का लाभ लेना चाहते हैं तो आपको यहां पर लिए गए वेबसाइट पर क्लिक करना होगा|
  • जब आप वेबसाइट पर क्लिक करोगे तब आपके पास सभी लागू योजनाएं खुल जाएंगी |
  • आप वहां से आवेदन पत्र डाउनलोड करके उसने अपनी पूरी जानकारी भरके सबमिट बटन पर क्लिक करें|

Nishulk Boring

उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजना हेल्पलाइन नंबर

कार्यालय का पता
मुख्य अभियंता,
लघु सिंचाई विभाग,
तृतीय तल, उत्तर विंग, जवाहर भवन,
लखनऊ 226001

फोन नं० : 2286627 / 2286601 / 2286670
फैक्स : 2286932
ईमेल : milu-up@nic.in

दोस्तों यदि आप उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजना से संबंधित कोई भी शिकायत करना चाहते हैं तो यहां पर क्लिक करें|

दोस्तों यदि आप उत्तर प्रदेश लघु सिंचाई योजना के बारे में कोई जानकारी पूछना चाहते हैं तो हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं|हम आपके प्रश्नों का जवाब जरुर देंगे कृपया हमारे फेसबुक पेज को लाइक और शेयर करना ना भूलें हम आपकी जरुर सहायता करेंगे|

4 comments

  • Ravi Kumar

    Ji main new tubewell karvna chahta hu anudan prapt karne ke liye or application ke liye kya karna hoga

    Reply
  • Tara singh

    Maine ek bor karaya tha 180 fit ab us bor me meri mother fuk kr andar fas gayi hai kripya bataye vibhAg hmRi kis tarah sahayta kr sakta hai

    Reply
    • Arti

      tara ji form fill kero aap…….. सामान्य जाति के लघु एवं सीमान्त कृषकों हेतु अनुदान
      इस योजना मे सामान्य श्रेणी के लघु एवं सीमान्त कृषकों हेतु बोरिंग पर अनुदान की अधिकतम सीमा क्रमशः रू0 5000.00 व रू0 7000.00 निर्धारित है। सामान्य लाभार्थियों के लिये जोत सीमा 0.2 हेक्टेयर निर्धारित है। सामान्य श्रेणी के कृषकों की बोरिंग पर पम्पसेट स्थापित करना अनिवार्य नहीं है, परन्तु पम्पसेट क्रय कर स्थापित करने पर लघु कृषकों को अधिकतम रू0 4500.00 व सीमान्त कृषकों हेतु रू0 6000.00 का अनुदान अनुमन्य है।

      अनुसूचित जाति/जनजाति कृषकों हेतु अनुदान
      अनुसूचित जाति/जनजाति के लाभार्थियों हेतु बोरिंग पर अनुदान की अधिकतम सीमा रू0 10000.00 निर्धारित है। न्यून्तम जोत सीमा का प्रतिबंध तथा पम्पसेट स्थापित करने की बाध्यता नहीं है। रू0 10000.00 की सीमा के अन्तर्गत बोरिंग से धनराशि शेष रहने पर रिफ्लेक्स वाल्व, डिलिवरी पाइप, बेंड आदि सामग्री उपलब्ध कराने की अतिरिक्त सुविधा भी उपलब्ध है। पम्पसेट स्थापित करने पर अधिकतम रू0 9000.00 का अनुदान अनुमन्य है।

      एच.डी.पी.ई.पाइप हेतु अनुदान
      वर्ष 2012-13 से जल के अपव्यय को रोकने एवं सिंचाई दक्षता में अमिवृद्धि के दृष्टिकोण से कुल लक्ष्य के 25 प्रतिशत लाभार्थियों को 90mm साईज का न्यूनतम 30मी0 से अधिकतम 60 मी0 HDPE Pipe स्थापित करने हेतु लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम रू0 3000.00 का अनुदान अनुमन्य कराये जाने का प्राविधान किया गया है। कृषकों की माँग के दृष्टिगत शासनादेश संख्या-955/62-2-2012 दिनांक 22 मार्च 2016 से 110 mm साईज के HDPE Pipe स्थापित करने हेतु भी अनुमन्यता प्रदान कर दी गयी है।

      पम्पसेट क्रय हेतु अनुदान
      निःशुल्क बोरिंग योजना के अन्तर्गत नाबार्ड द्वारा विभिन्न अश्वशक्ति के पम्पसेटों के लिए ऋण की सीमा निर्धारित है जिसके अधीन बैकों के माध्यम से पम्पसेट क्रय हेतु ऋण की सुविधा उपलब्ध है। जनपदवार रजिस्टर्ड पम्पसेट डीलरों से नगद पम्पसेट क्रय करने की भी व्यवस्था है। दोनों विकल्पो में से कोई भी प्रक्रिया अपनाकर ISI मार्क पम्पसेट क्रय करने पर अनुदान अनुमन्य है।

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